Wednesday, April 06, 2011

जीवन गीत

हलका फुलका बुलबुले सा लम्हा
इधर उधर आसमान में उढ़ता
मचलता नाचता रहता
अपनी ही धुन का राही था  वो


प्यारी सी  सुरीली  सी  नगमा
सुर और ताल का वो टुकड़ा
गीत और बोल गुनगुनाती 
संगीत अपना सजाती थी  वो


देखो आज वो छोटा सा लम्हा
आके नगमे से है मिल रहा
एक नया संसार रचाना चाहता
खुद को यादगार बनाना चाहता है वो


नगमा भी तो लम्हे को चाहती
उसमें भर के उसको मधुर बनाके
सदा बहार वाला राग रचा के
रस वाला जीवन बनाना चाहती है वो ..


उनके अनोखे संगम को देखो
जीवन के मुख्य दो अंश को देखो
हर लम्हे में नगमे को देखो
और ऐसे ही हर पल को जीके तो देखो
अतुल्य जीवन मिलेगा तुमको .....