Friday, April 08, 2011

कहो ना कभी



 कहो  ना कभी की तुम मेरे साथ साथ आओगे
दिन कई मेरे संग बिताओगे
रातों में ख्वाब में भी तुम आओगे


कहो  ना कभी ऐसे भी, की मेरे संग तुम गाओगे
गीत नए धुन नयी हमारे वासते बनोगे
मेरी नज़रों के सामने नाचते ही जाओगे
मुस्कुराहटों से तुम मेरी दुनिया को भर जोगी




कहो  ना कभी की मेरे हाथों में हाथ तुम डालोगे
पैरों से पैर हर घडी मिलाओगे
हर सफ़र को ताज़ा तुम बनाओगे 
हर डगर को अपने रंगों से रंगते ही जाओगे

कहो  ना अब क्यूँ खामोश हो ?
दिलबर मेरे कहाँ मदहोश हो ?
वादा नहीं.. सिर्फ बोल दो
की सदा के लिए .. एक है हम जिस्म दो ...

Thursday, April 07, 2011

इंतज़ार ख़तम होने को है



चाहे जहां तू चले .. चाहे जिधर तू थमे
रहूँ मै तेरे लिए, हर घडी, हर जगेह..


ख्वाबों को तेरे, करदूं हसीन
भर दू तेरे दिल में हसी


ख्वाहिशों को तेरी कर दूं पूरा
न छोडूं तेरी किसी चाह को अधूरा


ऐसे तुझे समेट लूं अपनी ओढ़ में
जैसे नमी छुपी ओस कि बूंद में 


थामी है मैंने बाहें तेरी 
पाऊँगा प्यार वाली मंजिल तेरी 


है कसम मेरी जान-ऐ-हसीन 
चलता जाऊंगा चाहे जले ज़मीन


इंतज़ार मेरा कुछ पल कर लेना तू 
पूरी होने को हमारी हर आरज़ू .... 


खोना नहीं मुझपे यकीन .. 
मै दूर सही जुदा नहीं 


ऐ वफ़ा, मै दीवाना तेरा 
तुझ बिन नहीं कोई आशियाना मेरा 


ऐ वफ़ा ये वादा है मेरा
फूलों से भरा होगा आनेवाला कल तेरा


पर ये कल ना मेरा न तेरा,
बस है सपनो का ही सहारा

Wednesday, April 06, 2011

जीवन गीत

हलका फुलका बुलबुले सा लम्हा
इधर उधर आसमान में उढ़ता
मचलता नाचता रहता
अपनी ही धुन का राही था  वो


प्यारी सी  सुरीली  सी  नगमा
सुर और ताल का वो टुकड़ा
गीत और बोल गुनगुनाती 
संगीत अपना सजाती थी  वो


देखो आज वो छोटा सा लम्हा
आके नगमे से है मिल रहा
एक नया संसार रचाना चाहता
खुद को यादगार बनाना चाहता है वो


नगमा भी तो लम्हे को चाहती
उसमें भर के उसको मधुर बनाके
सदा बहार वाला राग रचा के
रस वाला जीवन बनाना चाहती है वो ..


उनके अनोखे संगम को देखो
जीवन के मुख्य दो अंश को देखो
हर लम्हे में नगमे को देखो
और ऐसे ही हर पल को जीके तो देखो
अतुल्य जीवन मिलेगा तुमको .....